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मुबारकबाद नए साल की

नव वर्ष में नव गीत का सृजन कर लो
जीवन में अपने कुछ परिवर्तन कर लोे
हैं इस दुनिया में बेरंग और दुखी बहुतेरे
संग उनके अपना भी जीवन रंगन कर लोे

मैं , सुमित आपको और आपके परिवार को  दिल से नव वर्ष 2⃣0⃣1⃣7⃣ की बहुत ढ़ेर सारी हार्दिक❤ शुभकामनायें देता हूँ।

©सुमित चंद्र सेठ
सुमित कुमार सोनी (फेसबुक)

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संतुष्टि

संतुष्टि         
एक नई प्रेमकहानी लिख रहा था लेकिन घर में शोर कुछ ज्यादा ही था, तो मैं डायरी लेकर अपने दोस्त ऋतिक के कैफ़े में चला गया , ऋतिक कैफ़े में नहीं था तो मैंने खुद ही काउंटर पर कॉफी के लिए बोला और सबसे कोने वाली एक टेबल पर अपना अड्डा जमा लिया जहाँ हम दोस्त अक्सर ही बैठा करते थे।
अचानक कुछ खयालों की तरंगे मन में उठीं तो मैं अपनी डायरी में उन्हें सहेजने लगा तभी वहाँ का स्टाफ महेश आया और बोला की भैया यहाँ इनको भी बैठा दूँ , कोई दिक्कत तो नहीं है ना , देखिये ना आज वैलेंटाइन के चलते भीड़ बहुत है तो कोई सीट खाली नहीं है।
मैंने बिना ऊपर देखे ही हाँ में जवाब दिया और बोला की अरे यार महेश मेरी कॉफी भी रखता जा , कब से इन्तजार कर रहा हूँ।
लगभग 5 मिनट बीत चुके थे , अचानक से एक प्यारी सी आवाज कानों में मिश्री घोलने लगी , अरे आपकी काफी ठंडी हो रही है मिस्टर ....!!
सुनते ही दिल मचल गया , नजरें सामने की चेयर पर बैठे खूबसूरत चेहरे पर जो टिकी तो टिकी ही रह गई , क्या खूबसूरती थी रेशमी बाल, कटारी जैसे नैन, नाक में नथ और गुलाब से गुलाबी होठ ......उफ्फ ...!!
तभी वो फिर बोल पड़ी - बड़े अजीब हैं आप , बार…

प्रेम पत्र - love later

प्रेमपत्र

सुनो ,
            जब मैंने तुम्हे पहली बार देखा था न तभी से तुम मेरे जेहन में बस गई हो सोते जागते हँसते रोते खाते पीते समय , यानी की हर समय मुझे तुम्हारी ही प्यारी सी सूरत दिखाई देती है

जब से नजरो में आई हो 
तुम तो दिल में छाई हो 
हो गया हूँ जैसे बेबस मैं 
तुम तो मेरी जिंदगी में समाई हो ।

वही झील सी आँखे वही नदियो के मुहाने से खूबसूरत होंठ प्यारी सी नाक भोला भाला और सबसे अच्छा वाला चेहरा और इस चेहरे पर लटकती हुई तुम्हारी ये लटें जिन्हें तुम अपने हांथो की अँगुलियों से बार बार उठाकर कान के पीछे फंसा देती हो और ये है की किसी बदमाश की तरह फिर से तुम्हारे कोमल से गालों पर तुम्हे छेड़ने के लिए आ जाते है ।

झील सी आँखे और गुलाबी गाल देखूं
रब का बनाया एकशक्शकमाल देखूं
जो तू नहीं तो शायदगरीब हो जाऊं
और तू मिले तो मैं मालामाल हो जाऊँ

ना जाने क्यों मैं चाह कर भी कुछ और अलग नही सोच पाता हूँ कई बार मैंने कोशिश भी की मैं तुम्हारे बारे में ना सोच कर कुछ और सोचूँ या फिर किसी और को याद करूँ पर नहीं यार कुछ समझ ही नही आता की अब ये मेरा दिल मेरी ही बात क्यों नही मान रहा है मुझसे ही बेवफाई क्यों कर रहा है ऐ…

वर्तमान हिंदी सिनेमा

वर्तमान हिंदी सिनेमा

हम आज आदरणीय दादा साहब फाल्के जी के द्वारा लगाये गए उस बीज की चर्चा कर रहे है जो आज एक विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है ।
हिंदी सिनेमा आज हमारे मनोरंजन के साथ - साथ कुछ नए तहजीबों और नए तरीकों को सिखने का एक जरिया भी है इसी के वजह से हम अपने देश तथा विदेशों के भी अन्य विशेष गुणों को सिख लेते है जिन्हें हम शायद प्रत्यक्ष रूप से कभी भी जान नही पाते ।
विगत कई वर्षों से रामायण - महाभारत तथा पुराणों से  संबंधित कई फिल्में आई जिन्हें देखकर लोग कुछ अपने धार्मिक पुराणों और उनके किरदारों तथा पूज्य देवी देवताओं के बारे में रोचकता पूर्वक अधिक जानकारी भी प्राप्त किये ।

कुछ पारिवारिक पृष्ठभूमि की बेहतरीन फ़िल्में भी आई जिनके कारण हमारे समाज के रहन - सहन में भी थोड़ा और बदलाव आया जिससे हम अपने संस्कारों के साथ- साथ आधुनिक भी बनें ।

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