Thursday, 28 April 2016

हौसले उड़ान के

                उड़ान

एक नन्हा परिंदा उड़ान भरने की कोशिश करता लेकिन बार-बार कुछ ऊपर उठकर गिर जाता। दूर से एक अनजान परिंदा अपने मित्र के साथ बैठा यह सब गौर से देख रहा था। कुछ देर बाद वह उसके करीब पहुंचा और बोला,   क्या हुआ, बहुत परेशान हो।  
नन्हा परिंदा बोला,   मुझे शाम होने से पहले अपने घोंसले तक लौटना है। उड़ान भरना अभी ढंग से नहीं आता। क्या आप मुझे उडऩा सिखा सकते हैं?  
परिंदा बोला,   जब सीखा नहीं तो इतना दूर निकल आने की क्या जरूरत थी।  
वह नन्हे परिंदे का मजाक उड़ाने लगा। अनजान परिंदा हंसते हुए बोला,   देखो, हम तो उड़ान भरना जानते हैं और अपनी मर्जी से कहीं भी जा सकते हैं।
इतना कहकर उसने नन्हे परिंदे के सामने पहली उड़ान भरी। वह फिर थोड़ी देर बाद लौट आया और दो-चार कड़वी बातें बोलकर फिर उड़ गया। ऐसा उसने 5-6 बार किया।
एक बार जब वह वापस लौटा तो नन्हा परिंदा वहां नहीं था। यह देख अनजान परिंदा खुश होते हुए अपने साथी से बोला,   आखिर उस नन्हे परिंदे ने उड़ान भर ही ली।  
साथी बोला,   तुम इतना खुश क्यों हो रहे हो? तुमने तो उसका इतना मजाक बनाया था।
वह बोला,   वास्तव में यह मेरा उसे उडऩा सिखाने का एक तरीका था। मैं उसके लिए अजनबी था। यदि उसे सीधे तरीके से उडऩा सिखाता तो वह पूरी जिंदगी मेरे एहसान तले दबा रहता। उसे दूसरों से मदद मांगने की आदत पड़ जाती। जब मैंने उसे कोशिश करते हुए देखा, तभी समझ गया था कि इसे बस थोड़ी-सी दिशा देने की जरूरत है और वह मैंने बार-बार उसके सामने उड़ते हुए उसे दे दी। अब वह खुद उड़ता रहेगा और दूसरों से मदद कभी नहीं मांगेगा।  
वास्तव में सच्ची मदद वही है, जो मदद पाने वाले को यह महसूस ही न होने दे कि उसकी मदद की गई है।


अब उड़ान भरने का समय आगया है मित्रो ।
यही वक्त है एक ऊँची उड़ान भर के दिखा देने का की

हम नही है किसी और के हाथो के मोहताज
हम तो खुद ही सजायेंगे अपना ताज ।

सुमित सोनी

Wednesday, 23 March 2016

वो - vo


U hi kyu log mil jate hai log
dil me kyu bas jaate hai log
Agr hmari jindagi me nhi aana hota hai 
To Aakhir kyu hmse dil lgate hai log 

Jb Ek din 6od jana hota hai
Jb Ek din tadpana hota hai 
U hmko rat bhar rulana hota hai
To Aakhir kyu hmse dil lgate hai log

आपका दोस्त - सुमित सोनी


Special post

मेरा बचपन

            बचपन- छुटपन की यादों में  खोये छुटपन की यादो में जब मस्त मगन हम होते थे वो दिन भी कितने अच्छे थे जब हम अनजाने बच्चे थे । ...