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लोग क्या कहेंगे -एक यक्ष प्रश्न


             लोग क्या कहेंगे 

ये तो एक यक्ष प्रश्न है जो शायद हर किसी को कभी ना कभी कुछ ना कुछ अच्छा करने से रोकता है ।
अगर देखा जाये तो हर एक अच्छा कार्य करते समय हम सभी के मन में यही सवाल आता है की आखिर लोग क्या सोचेंगे ...............आखिर लोग क्या कहेंगे ।
हम में से ही कुछ लोग थोड़े से क्रांतिकारी स्वभाव के भी होते है जो लोगो के सोचने और कहने की चिंता को छोड़ देते है और अपने कार्य को पूरी शिद्दत के साथ कर जाते है सफलता उनके कदम चूमती है वहीं कुछ लोग उसी यक्ष प्रश्न से डर के कारण जिंदगी में एक अच्छा सुअवसर खो देते है

मैंने अपने बचपन में पिता -पुत्र और उनके गधे वाली एक कहानी सुनी थी शायद आपने भी सुनी ही होगी खैर मैं फिर से सुनाता हु

एक बार की बात है  "" एक आदमी और उसका बेटा एक गधा खरीदकर पैदल जा रहे थे .वो एक गांव से गुजरते हैं तो लोग कहते हैं कि देखो कितने मुर्ख हैं साथ में इतना हट्टा कट्टा गधा लिए हैं और पैदल जा रहे हैं , दोनों ने सोचा फिर दोनों गधे पर बैठ गए ...अब दूसरे गांव पहुंचे तो लोग कहते हैं कि देखो इनको बेचारे गधे की जान निकाले ले रहे हैं दोनों बाप बेटा एक ही गधे पर लदे हैं ... !! ...दोनों ने फिर सोचा फिर बाप कहता है कि बेटा तू बैठा रह और बाप पैदल चलने लगता है अब तीसरे गांव में पहुंचते हैं तो लोग कहते हैं देखो बूढा बाप पैदल चल रहा है और बेटा बैठा है ...फिर बेटा नीचे आ जाता है और बाप को बैठा देता है ..अब अगले गांव पहुँचते हैं तो लोग कहते हैं कि देखो हट्टा कट्टा बाप गधे पर लदा है और छोटे से बच्चे को धूप में पैदल चला रहा है ""

मुझे लगता है की आप भी सब माजरा समझ ही गए होंगे , अगर आप का जवाब हाँ में है तो फिर स्वामी विवेकानंद के उन शब्दों को याद कीजिये चलिए उठिए दौड़िये और अपनी मंजिल को पाने तक ना कभी रुकिए और ना ही हिम्मत हारिये और लोगो के तानो की चिंता मत कीजिये क्योंकि.....

कुछ तो लोग कहेंगे , लोगो का काम है कहना
हम तो चलते रहेंगे हमारा है काम चलना

और आखिर में मैं किसी फ़िल्म का वो डायलॉग भी याद दिलाना चाहूँगा की

जब हम किसी चीज को पाने के लिए पुरे मन से प्रयास करते है तो पूरी कायनात ही उसे हमसे मिलाने में लग जाती है ।

                         ||  समाप्त   ||

आपका मित्र - सुमित सोनी

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