शायरी

एक ख्वाहिश है मुझे
        बस तेरे दीदार की 
फुरसत जो तुझे मिले 
         मेरे ख्वाबो में चले आना
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है दिल तोडना जुर्म 
     और ये किया भी उसने
मगर मेरे मौला कर रहम
       की तू उसे सजा न देना ।।
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उसे ही चाहा था मैंने 

       और उसपे ही एतबार किया 
एक वो बेवफा निकली जो
        धोखे का खंजर दिल के पार किया ।

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मेरी जब भी जरुरत हो

तुम आवाज देना मुझे
मैं गुजरा हुआ वक्त नहीं
जो वापस ही ना आ सकूँ ।।

काश की तुझको भी मेरा इंतजार रहता

काश की तेरा दिल भी बेक़रार रहता
मुझको तो तुझसे है प्यार बहुत लेकिन
काश की तुझको भी मुझसे प्यार होता ।।

सफ़र तो बहुत छोटा था मेरा तेरे संग ..............

पर तू दिल में बस गई हमेशा के लिए .................



यूँ इस तरह ख्वाबो में आकर 
मुझे ना परेशान कर ।
हो सके तो जिंदगी में आकर

जीना आसान कर।।


तू तो जानती है ना
      की मुश्किल है तेरे बिना जी पाना
फिर भी क्यों नही मिलती है 
         क्या तुझे अच्छा लगता है तड़पाना ।।





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