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Showing posts from December, 2016

मुबारकबाद नए साल की

नव वर्ष में नव गीत का सृजन कर लो
जीवन में अपने कुछ परिवर्तन कर लोे
हैं इस दुनिया में बेरंग और दुखी बहुतेरे
संग उनके अपना भी जीवन रंगन कर लोे

मैं , सुमित आपको और आपके परिवार को  दिल से नव वर्ष 2⃣0⃣1⃣7⃣ की बहुत ढ़ेर सारी हार्दिक❤ शुभकामनायें देता हूँ।

©सुमित चंद्र सेठ
सुमित कुमार सोनी (फेसबुक)

राष्ट्रप्रेम

राष्ट्रप्रेम


”जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।”

अर्थात्

मनुष्य ही नहीं वरन् चर-अचर, पशु-पक्षी सभी अपनी मातृभूमि से प्यार करते हैं ।


राष्ट्रप्रेम - राष्ट्र के प्रति सम्मान भाव रखना ,सदैव राष्ट्रहित में तत्पर रहना राष्ट्रप्रेम कहलाता है ।

राष्ट्र प्रेम हमारे अंदर की वो भावना है जो हमें अपने राष्ट्र के प्रति कृतज्ञ बनाती है , इसी भावना तथा श्रद्धा के कारण ही बहुत से वीर मातृभूमि के लिए प्राण भी दे चुके है और बहुत से वीर जवान अभी जज्बा भी रखते है ।


राष्ट्रप्रेम का अर्थ सिर्फ यह नही है की हम सीमा पर जाकर दुश्मन देशों से युद्ध कर के ही प्रेम जताए , स्थान से ज्यादा हमारा भाव महत्त्व रखता है हम युद्ध के अलावा नित्यप्रति भी अपने कर्मों से राष्ट्रप्रेम कर सकते है लेकिन याद रखें की हमे सिर्फ राष्ट्र प्रेम करने की आवश्यकता है , राष्ट्रप्रेम करते हुए दिखावा करने की नहीं ।



शायद आप लोगों ने भी अपने बचपन में स्वामी रामतीर्थ के जापान यात्रा के दौरान घटित हुए प्रसंग को पढ़ा होगा , जब स्वामी रामतीर्थ एक रेलवे स्टेशन पर अच्छे फलों की तलाश में थे और उन्होंने कहा की शायद यहां अच्छे फल मिलते ही नही तो एक ज…