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Showing posts from April, 2016

हौसले उड़ान के

उड़ान

एक नन्हा परिंदा उड़ान भरने की कोशिश करता लेकिन बार-बार कुछ ऊपर उठकर गिर जाता। दूर से एक अनजान परिंदा अपने मित्र के साथ बैठा यह सब गौर से देख रहा था। कुछ देर बाद वह उसके करीब पहुंचा और बोला,   क्या हुआ, बहुत परेशान हो।  
नन्हा परिंदा बोला,   मुझे शाम होने से पहले अपने घोंसले तक लौटना है। उड़ान भरना अभी ढंग से नहीं आता। क्या आप मुझे उडऩा सिखा सकते हैं?  
परिंदा बोला,   जब सीखा नहीं तो इतना दूर निकल आने की क्या जरूरत थी।  
वह नन्हे परिंदे का मजाक उड़ाने लगा। अनजान परिंदा हंसते हुए बोला,   देखो, हम तो उड़ान भरना जानते हैं और अपनी मर्जी से कहीं भी जा सकते हैं।
इतना कहकर उसने नन्हे परिंदे के सामने पहली उड़ान भरी। वह फिर थोड़ी देर बाद लौट आया और दो-चार कड़वी बातें बोलकर फिर उड़ गया। ऐसा उसने 5-6 बार किया।
एक बार जब वह वापस लौटा तो नन्हा परिंदा वहां नहीं था। यह देख अनजान परिंदा खुश होते हुए अपने साथी से बोला,   आखिर उस नन्हे परिंदे ने उड़ान भर ही ली।  
साथी बोला,   तुम इतना खुश क्यों हो रहे हो? तुमने तो उसका इतना मजाक बनाया था।
वह बोला,   वास्तव में यह मेरा उसे उडऩा सि…