Saturday, 4 February 2017

वर्तमान हिंदी सिनेमा

                वर्तमान हिंदी सिनेमा

हम आज आदरणीय दादा साहब फाल्के जी के द्वारा लगाये गए उस बीज की चर्चा कर रहे है जो आज एक विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है ।
हिंदी सिनेमा आज हमारे मनोरंजन के साथ - साथ कुछ नए तहजीबों और नए तरीकों को सिखने का एक जरिया भी है इसी के वजह से हम अपने देश तथा विदेशों के भी अन्य विशेष गुणों को सिख लेते है जिन्हें हम शायद प्रत्यक्ष रूप से कभी भी जान नही पाते ।
विगत कई वर्षों से रामायण - महाभारत तथा पुराणों से  संबंधित कई फिल्में आई जिन्हें देखकर लोग कुछ अपने धार्मिक पुराणों और उनके किरदारों तथा पूज्य देवी देवताओं के बारे में रोचकता पूर्वक अधिक जानकारी भी प्राप्त किये ।

कुछ पारिवारिक पृष्ठभूमि की बेहतरीन फ़िल्में भी आई जिनके कारण हमारे समाज के रहन - सहन में भी थोड़ा और बदलाव आया जिससे हम अपने संस्कारों के साथ- साथ आधुनिक भी बनें ।

21 वीं सदी का यह दौर भी भारतीय सिनेमा में एक नए किस्म का बदलाव लेकर आया अब कई तरह की फ़िल्में बनने लगी है जिनमे से कुछ तो हमारे समाज के लिए सकारात्मक सन्देश देती है परंतु कुछ फ़िल्में ऐसी भी होती है जिनके कारण  दर्शक अपने जीवन की वास्तविकता से दूर होकर हवाई किले बनाने लगता है । कुछ फिल्मों में तो अश्लीलता दिखाने में भी संकोच नहीं होता । इनका किशोर मन पर बहुत बुरा प्रभाव पडता है । ऐसे फिल्मो को देखकर किशोर छोटी उम्र में ही अपने आवेगो पर से नियंत्रण खो बैठते है । कुछ लोगों के अंतर्मन पर मार-काट, हिंसा, बलात्कार, चोरी और डकैती आदि के व्यापक प्रदर्शन का बहुत  बुरा प्रभाव पड़ता है।

परंतु अब कुछ 3 - 4 वर्षों से हिंदी सिनेमा के विषय में फिर से बदलाव आने लगा है और अब तो उन सभी विषयों पर फिल्म बन रही है, जिसे समाज में कभी छिपाया जाता था. जैसे मानसिक रोग, समलैंगिकता, वैश्या बाज़ार, लिव-इन रिलेशनशिप, तलाक़, एक से ज्यादा प्रेम-संबंध. यह सब ऐसे विषय है जिन पर आज भी समाज का कई वर्ग बात करने से भी कतराता है. लेकिन फिल्मों के माध्यम से अब इन सभी विषयों पर लोग आपस में बात करने लगे है. इन सभी विषयों को समाज का हिस्सा मानने लगे है जिस से जागरूकता ही फैली है।

हाइवे जैसी फिल्में इसी सिनेमा के आज के परिवेश की देन हैं जिनसे अपने परिवार में लड़कियों पर हो रहे शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने को ताकत और तरीका मिलता है , कुछ बायोपिक फ़िल्में जो की किसी विशेष व्यक्तित्व के जीवन पर आधारित होता है जिन्हें देख कर हमे भी जीवन मे कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है  मैरीकॉम और भाग मिल्खा भाग ऐसे फिल्मो के जबर्दस्त उदाहरण है ।


अभी हाल ही में एक सुल्तान नाम की फ़िल्म भी आई थी जो हमे हमारे सामान्य जीवन से जुडी लगने के कारण सकारात्मक विचारों से लबरेज कर रही थी ।

ऐसी ना जाने कितनी ही फिल्में आई जिन्होंने हमें कुछ अच्छा सिखाया तथापि कुछ बुरी फ़िल्में भी आई जिनके जिम्मेदार सिर्फ निर्माता ही नहीं वरन् कुछ हद तक दर्शक भी है यदि दर्शक ही ऐसे फिल्मों को सिरे से ख़ारिज कर दें जिनमे फूहड़ और अश्लील  दृश्यों और शब्दों से सजाया गया है तो ऐसी फिल्म आना स्वतः ही बंद हो जायेगी ।


उपसंहार - यदि हम गौर करे तो ऊपर बताई गई हानियाँ सभी सिनेमा की बुराइयाँ नहीं कही जा सकती , कुछ बुरी फिल्मों का कारण उसके निर्माताओं की अज्ञानता और धन-लोलुपता है। यदि निर्माता का उद्देश्य केवल धन कमाना ही ना हो तो हमारी फिल्मो का स्तर और भी ऊँचा उठ सकता है और इनकी मदद से देश का बड़ा उपकार हो सकता है । यदि इन बुराइयों को दूर कर दिया जाये, तो निश्चय ही हमारा भारतीय सिनेमा मानव-जीवन के विकास और देश के निर्माण में बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है ।


©सुमित चंद्र सेठ
सुमित कुमार सोनी
9450489148

Saturday, 28 January 2017

खुला खत - 1 (शोहदों के नाम )

एक खुला ख़त तमाम शोहदों के नाम


नमस्कार ,

                समझ नहीं आता की कैसे और कहाँ से शुरू करूँ , आखिरकार आप लोगों की करस्तानियाँ ही ऐसी हैं ।

आप कॉलेजों के बाहर , गलियों के मुहानो पर तथा नुक्कड़ों पर मिलने वाले वही महान विभूतियाँ है जो लड़कियों का जीना हराम कर देते हैं ।

                  यूँ ही आवारागर्दी करते करते आप को कोई भोली भाली सी लड़की पसंद आ जाती है, कुछ दिनों तक आप उसे राह चलते देख देख कर आँख सेकते हैं(आपकी भाषा में) ,  फिर उस लड़की का नाम पता करते हैं , अब आप उस लड़की से ना जाने किस सस्ते टाइप का प्यार करने लगते है जिसके मूल में देहाकर्षण ही होता है परंतु आप इसे सच्चे प्यार का नाम देते है और आप अब उस लड़की को पाने के लिए जमीन आसमान एक करने लगते हैं अपने दोस्तों वगैरह से बताते फिरते हैं सिवाय उस लड़की को बताने के !!!!


एक दिन वो भी आता है की आप अपने दोस्तों की बात मान लेते है और  बहुत हिम्मत करके अपना हाल ए दिल उस लड़की को बता देते हैं परंतु यह क्या ..............?

वो लड़की आप से प्यार करने से इन्कार कर देती है।


अब आपके अहंकार को ठेस पंहुचता है , आप सोचते है की उस लड़की की इतनी हिम्मत कैसे हुई की उसने आपको ना बोल दिया , आखिर उसने इंकार किया भी तो कैसे ?

आप सोचे भी क्यों नही, आखिर में आप तो उस लड़की को अपने बाप की जागीर समझते है की आप को वो पसन्द आई तो वो आपकी बात माने ही माने । आप तो उसे बाजार में मिलने वाली कोई वास्तु समझते हैं की अगर माल पसन्द आया तो बस दाम चुकता किया और माल लेकर चल दिए मगर अफ़सोस की इस बार तो आपको कोई ऐसा पसन्द आगया है जो किसी बाजार में मिलता ही नही तो आपको कैसे मिले ?


अब आपको बहुत गुस्सा आता है जिसके कारण आपके शैतानी दिमाग में यह विचार आता है की जब वो लड़की आप की ना हुई तो आप उसे किसी और की भी नही होने देंगे और यहीं पर एक गंभीर किस्म की आपराधिक भावना आपके मन मंदिर में जन्म ले लेती है और आप तेजाब द्वारा उस लड़की के सुंदर तन और उस से भी सुन्दर मन को जला देने की योजना बना डालते है या फिर किसी अन्य आपराधिक विधि द्वारा उस लड़की पर हमला कर के उसके गुरुर को तोड़ने का प्रयत्न करना चाहते हैं जबकि हकीकत तो कुछ और ही होती है ।

ये गुरुर उस कोमल हृदया के मन में ना होकर आपके हृदय में होता है जिसका साक्षात् प्रमाण आपके उसे आघात पँहुचाने के विचार ही है ।


चलिए एक बार आप उस लड़की के स्थान पर अपनी बहन को रख कर सोचिये या फिर आप ये कल्पना कीजिये की अगर कभी ऐसा हो की आप ही वो लड़की हैं और कोई अंजान सा आवारा लड़का आकर आपसे अपने प्रणय निवेदन का विचार कहे और जबरदस्ती आपसे प्रेम का रिश्ता बनाने को कहे तो आप को उस वक्त कैसा महसूस होगा , क्या आप उस लड़के के प्रेम निवेदन की बात मान लेंगे ?

नहीं ना , सोचिये जब आप नही मान सकते तो और कोई कैसे मानेगा ?

नफरत तो होगी ही ना ऐसे लोगो से , बस यही भावना उस लड़की के मन में भी आ जाती है जब आप उसके साथ जबरदस्ती प्यार का बर्ताव करते हैं ।


चलिए , उठिए, अपने इस झूठे प्रेम की बावड़ी से बाहर निकलिये , अपनी वासना और जिद को अपने मन मंदिर से निकाल के दूर फेंकिए और अपने समय और शक्ति का सदुपयोग कर के अपने आपको एक ऐसी शख्शियत बनाइये की जो लड़की आज आपको अस्वीकार कर गई है वो कल को अपने फैसले पर पछताए और और आपको पाने का सपना देखे ।और आपको लोगों के सामने शर्म से सर ना झुकाना पड़े , लोग आपकी नजीर दें ।


उम्मीद है की आगे से आप के द्वारा अपने झूठे प्रेम के लिए किसी लड़की को डराया नहीं दिया जायेगा उनके पंख को कतरा नही जायेगा और उन्हें उन्मुक्त गगन में स्वच्छंद विचरण करने दिया जायेगा ।



                                         धन्यवाद

                                   सुमित कुमार सोनी
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Saturday, 31 December 2016

मुबारकबाद नए साल की

नव वर्ष में नव गीत का सृजन कर लो
जीवन में अपने कुछ परिवर्तन कर लोे
हैं इस दुनिया में बेरंग और दुखी बहुतेरे
संग उनके अपना भी जीवन रंगन कर लोे

मैं , सुमित आपको और आपके परिवार को  दिल से नव वर्ष 2⃣0⃣1⃣7⃣ की बहुत ढ़ेर सारी हार्दिक❤ शुभकामनायें देता हूँ।

©सुमित चंद्र सेठ
सुमित कुमार सोनी (फेसबुक)

Wednesday, 14 December 2016

राष्ट्रप्रेम

       राष्ट्रप्रेम


”जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।”

अर्थात्

मनुष्य ही नहीं वरन् चर-अचर, पशु-पक्षी सभी अपनी मातृभूमि से प्यार करते हैं ।


राष्ट्रप्रेम - राष्ट्र के प्रति सम्मान भाव रखना ,सदैव राष्ट्रहित में तत्पर रहना राष्ट्रप्रेम कहलाता है ।

राष्ट्र प्रेम हमारे अंदर की वो भावना है जो हमें अपने राष्ट्र के प्रति कृतज्ञ बनाती है , इसी भावना तथा श्रद्धा के कारण ही बहुत से वीर मातृभूमि के लिए प्राण भी दे चुके है और बहुत से वीर जवान अभी जज्बा भी रखते है ।


राष्ट्रप्रेम का अर्थ सिर्फ यह नही है की हम सीमा पर जाकर दुश्मन देशों से युद्ध कर के ही प्रेम जताए , स्थान से ज्यादा हमारा भाव महत्त्व रखता है हम युद्ध के अलावा नित्यप्रति भी अपने कर्मों से राष्ट्रप्रेम कर सकते है लेकिन याद रखें की हमे सिर्फ राष्ट्र प्रेम करने की आवश्यकता है , राष्ट्रप्रेम करते हुए दिखावा करने की नहीं ।



शायद आप लोगों ने भी अपने बचपन में स्वामी रामतीर्थ के जापान यात्रा के दौरान घटित हुए प्रसंग को पढ़ा होगा , जब स्वामी रामतीर्थ एक रेलवे स्टेशन पर अच्छे फलों की तलाश में थे और उन्होंने कहा की शायद यहां अच्छे फल मिलते ही नही तो एक जापानी नवयुवक ने उन्हें कहीं से ताजे फलों की भरी हुई टोकरी लाकर दी और बोला की स्वामी जी कृपया अब कहीं पर ये न कहें की जापान में ताजे फल नही मिलते , ये उच्चकोटि का राष्ट्रप्रेम था ।


जब स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिका में भी भारतीयता का परचम लहराने के उद्देश्य से पूर्ण भारतीय वस्त्रो में वहां के निवासियों के प्रति पूर्ण अपनत्व का भाव रखते हुए एक कीर्तिमान स्थापित किया वो भी राष्ट्र प्रेम था ।


हमारे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों के बारे में तो आप जानते ही हैं की कई देशभक्तों ने अपने ठाठ बाठ वाले जीवन को त्याग कर राष्ट्र के भले के लिए कांटो - अंगारो वाले रास्तो पर चलना मंजूर किया उसे परम कोटि का देश प्रेम कहा जाता है ।



कुछ ऐसे कार्य है जिन्हें हम में से बहुत से लोग नित्यप्रति करते भी है तथा जो देश की भलाई के लिए ही होता है पर बहुत से लोग उसे राष्ट्र प्रेम का नाम नही देते ।


1- क्या आप भी असहायों के प्रति करुणा का भाव रखते हैं ?

2- क्या आप दुसरों की संभव मदद करते है ?

3- क्या आप रास्ते पर पड़े पत्थरों को हटा देते है ?

4- क्या आप बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक है ?

5- क्या आप सबका सम्मान करते हो ?

6 - क्या आप महिलाओं और बच्चों का सम्मान करते हैं ?

7- क्या आप सार्वजानिक स्थानों के साफ सफाई का भी विशेष ध्यान रखते है ?

8- क्या आप भी प्रचलित कुरीतियों के उन्मूलन की सोचते है और कुछ करते भी हैं ?


हमें यह याद रखना होगा की हमारी देशभक्ति सिर्फ झूठे दावे-दम्भ , जय जयकार , झंडे फहराना , कट्टरता दिखाने और जोर जोर से चिल्ला के अपनी देश भक्ति दिखाने तक ही ना सीमित रह जाए ।


अंत में तो मैं बस यही कह के अपनी वाणी को विराम देना चाहूँगा की -


जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है । वह नर नहीं, नर पशु निरा है और मृतक समान है ।।”


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Monday, 31 October 2016

नारी है या लाचारी

नारी है या लाचारी


नारी का होना नारी
जैसे सबसे बड़ी लाचारी है ।
मानवता तो ख़त्म हो रही
दानवता सब पर भारी है ।

सर्वप्रथम तुम कोख में मारते
जो पता लगा की बच्ची है ।
आखिर क्यों नही तुम समझते
यही  संतान तुम्हारी सच्ची है ।

जो बच गई कोख में फिर भी
शोषणता इसकी जारी है ।
मानवता तो ख़त्म हो रही
दानवता  सब पर भारी है ।

उसका हंसना और मुस्कुराना
सब पे तुम्हारी पाबन्दी है ।
क्यों करते हो तुम आखिर ये सब
क्यों सोच तुम्हारी गन्दी है।

बेटियों को तुम कब तक
इस तरह छिपाओगे ।
आखिर कब तुम खुद चेतोगे
कब बेटों को समझाओगे ।


बेटियो को टोकने की बजाय
बेटो से  तुम ये कह जाओ ।
प्यारी है कोमल है ये बेटीयाँ
तुम बेटों इन्हें बचाओ ।
तुम बेटों इन्हें बचाओ- अपनी मानवता को दिखलाओ।


जब इन बेटों ने ही बढ़ कर
थाम ली जिम्मेदारी

तब से ना कभी रोयेगी
हमारी बिटिया रानी- हमारी बिटिया रानी



                       सुमित कुमार सोनी

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Wednesday, 19 October 2016

रूठी है जिंदगी .....

रूठी है जिंदगी .......





आज जिंदगी कुछ रूठी सी लग रही है
रात तो आधी बीत गई है 
पर आँखे मेरी अब भी जग रही है 
आज जिंदगी कुछ रूठी सी लग रही है


आंसुओ का दरिया आँखों से बह रहा
मेरे दिल से दर्द का लावा निकल रहा 
अब तो सांसे भी छूटी छूटी सी लग रही है 
आज जिंदगी कुछ रूठी सी लग रही है


लग रहा ये सफर अब थम ही जायेगा
ना वो अपना अब मेरे पास आएगा 
अब हर सच्ची कहानी भी झूठी सी लग रही 
आज जिंदगी कुछ रूठी सी लग रही है 


आकर थाम लो , तुम मेरे हाथ को 
तड़प रहा हूँ मैं अब तेरे साथ को 
अरमानो की दिल में चिता जल रही है
आज जिंदगी कुछ रूठी सी  लग रही है


               - सुमित सेठ
सुमित कुमार सोनी (फेसबुक)
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Saturday, 10 September 2016

प्रेम पत्र - love later

            प्रेम पत्र

सुनो ,
            जब मैंने तुम्हे पहली बार देखा था न तभी से तुम मेरे जेहन में बस गई हो सोते जागते हँसते रोते खाते पीते समय , यानी की हर समय मुझे तुम्हारी ही प्यारी सी सूरत दिखाई देती है

जब से नजरो में आई हो 
तुम तो दिल में छाई हो 
हो गया हूँ जैसे बेबस मैं 
तुम तो मेरी जिंदगी में समाई हो ।

वही झील सी आँखे वही नदियो के मुहाने से खूबसूरत होंठ प्यारी सी नाक भोला भाला और सबसे अच्छा वाला चेहरा और इस चेहरे पर लटकती हुई तुम्हारी ये लटें जिन्हें तुम अपने हांथो की अँगुलियों से बार बार उठाकर कान के पीछे फंसा देती हो और ये है की किसी बदमाश की तरह फिर से तुम्हारे कोमल से गालों पर तुम्हे छेड़ने के लिए आ जाते है ।

झील सी आँखे और गुलाबी गाल देखूं
रब का बनाया एक शक्श कमाल देखूं
जो तू नहीं तो शायद गरीब हो जाऊं
और तू मिले तो मैं मालामाल हो जाऊँ

ना जाने क्यों मैं चाह कर भी कुछ और अलग नही सोच पाता हूँ कई बार मैंने कोशिश भी की मैं तुम्हारे बारे में ना सोच कर कुछ और सोचूँ या फिर किसी और को याद करूँ पर नहीं यार कुछ समझ ही नही आता की अब ये मेरा दिल मेरी ही बात क्यों नही मान रहा है मुझसे ही बेवफाई क्यों कर रहा है ऐसे लगता है की जैसे इसका मालिकाना हक तुम्हे ही मिल गया है ।

ये दिल हुआ है अब तेरा 
बस नही चल रहा मेरा ना जाने क्यों
गा रहा है ये तेरे धुन को ही हरपल
खुद को भूलता जा रहा है ना जाने क्यों
क्यों ऐसी बेबसी है छाई
क्यों ऐसी आफत है मुझपे आई
मेरा होकर भी ये मेरा दिल मेरा ना रहा
बस तेरी ही यादें मुझको हर पल आई



अब तो साँसे भी हर पल तुम्हारा नाम लेने लगी है और तो और ये सब मेरे साथ पहली दफा हो रहा है जब कोई मेरी जिंदगी में इस कदर छा गया है बस हर पल हर जगह उसी की तस्वीर दिखाई दे रही है और उसी के होने का अहसास हो रहा है और सच कहूँ तो मुझे भी इस से ख़ुशी मिलने लगी है अगर यही प्यार है तो मैं खुशनसीब हूँ की मैं भी प्यार को महसूस कर सकता हूँ और सच पूछो तो मैं इस अहसास को कभी खोना नही चाहता बोलो क्या तुम भी मेरा साथ दोगी ना इस जिंदगी को और भी हसीं बनाने में .......?


क्या तुम भी मेरे लिए कुछ ऐसा ही महसूस कर रही हो अगर हाँ तो क्या तुम जिंदगी भर के लिए मेरा हाथ थामना चाहोगी यकीन मानो मैं तुम्हे कभी भी जिंदगी के किसी मोड़ पर अकेला नही छोड़ूंगा । प्यार तो तुमसे बे- इंतेहा करता ही हूँ इसलिए हमेशा खुशियों के ढेर पर बैठा कर रखूँगा और तुम्हारे ऊपर गम के एक भी बादल बरसने नही दूंगा ।

साँसों में बसने लगी हो तुम
हो गया है तुमसे मुझे प्यार
बोलो तुम चलोगी मेरे साथ 
जिंदगी के सफर पर मेरे यार
क्योंकि 
तूम मेरी इबादत हो 
तुम लगती क़यामत हो 
मैं जी ना सकूँ तेरे बिन


बोलो ना क्या तुम मेरी जिंदगी की हमसफ़र बनोगी 
बोलो न क्या तुम मेरे साथ जिन्दगी भर का सफ़र चलोगी 
क्या तुम भी मुझसे बिना शर्त के बे - इंतेहा मुहब्बत करोगी ।

 मेरे आखिरी शब्द -
मुझे नही पता की तुम क्या सोच रही हो मगर मैं और मेरा दिल हम दोनों हमेशा यही कहेंगे की 
हमें तुमसे मुहब्बत है
हमें तुमसे मुहब्बत है 
में तुमसे मुहब्बत है

हमेशा की तरह आज भी तुम्हारे इन्तजार में

                      
                              सिर्फ तुम्हारा
                                  
                                  ( सुमित )


सुमित कुमार सोनी - फेसबुक

Thursday, 25 August 2016

इश्क़ में धोखे .......

                इश्क़ में धोखे .....



इश्क़ के आग से जले तो पता चला
की लोग मीठे तो होते पर झूठे भी ।।


जब खून के बदले खून 
और रिश्ते के बदले रिश्ते बनाये जाते है 
तब क्यों इस दुनिया में 
प्यार के बदले धोखे खाये जाते है ।



 मैंने जो तुझसे प्यार किया 
लगा की खंजर दिल के पार किया 
इस दिल को मिले चोट इतने 
तुमने क्यों इसे तार तार किया


कोई दस्तूर सा जैसे 
निकला हो बेवफा बन जाने को
जो भी मिला यारो 
बैठा गलतियाँ गिनाने को 
मेरी छोटी सी गलती 
उनके आँख की किरकिरी बन गई 
उन्हें क्या पता की ना जाने कब वो
मेरी ख़ुशी , मेरी जिंदगी बन गई


आपका दोस्त - सुमित सोनी

Friday, 5 August 2016

मेरी कायनात हो

             " मेरी कायनात हो "

जैसे की तुम मेरी
            सारी कायनात हो
हर पल मेरे लबो पे
             तेरी ही बात हो
तू ही दिखे मुझको
              दिन हो या रात हो
चाहूँगा मैं यही की
              हर पल तेरा साथ हो
लगता है जैसे तुम
              मेरे रब की सौगात हो

क्योंकि तुम ही तो मेरी
               सारी कायनात हो

आपका दोस्त - सुमित सोनी

Friday, 17 June 2016

लोग क्या कहेंगे -एक यक्ष प्रश्न


             लोग क्या कहेंगे 

ये तो एक यक्ष प्रश्न है जो शायद हर किसी को कभी ना कभी कुछ ना कुछ अच्छा करने से रोकता है ।
अगर देखा जाये तो हर एक अच्छा कार्य करते समय हम सभी के मन में यही सवाल आता है की आखिर लोग क्या सोचेंगे ...............आखिर लोग क्या कहेंगे ।
हम में से ही कुछ लोग थोड़े से क्रांतिकारी स्वभाव के भी होते है जो लोगो के सोचने और कहने की चिंता को छोड़ देते है और अपने कार्य को पूरी शिद्दत के साथ कर जाते है सफलता उनके कदम चूमती है वहीं कुछ लोग उसी यक्ष प्रश्न से डर के कारण जिंदगी में एक अच्छा सुअवसर खो देते है

मैंने अपने बचपन में पिता -पुत्र और उनके गधे वाली एक कहानी सुनी थी शायद आपने भी सुनी ही होगी खैर मैं फिर से सुनाता हु

एक बार की बात है  "" एक आदमी और उसका बेटा एक गधा खरीदकर पैदल जा रहे थे .वो एक गांव से गुजरते हैं तो लोग कहते हैं कि देखो कितने मुर्ख हैं साथ में इतना हट्टा कट्टा गधा लिए हैं और पैदल जा रहे हैं , दोनों ने सोचा फिर दोनों गधे पर बैठ गए ...अब दूसरे गांव पहुंचे तो लोग कहते हैं कि देखो इनको बेचारे गधे की जान निकाले ले रहे हैं दोनों बाप बेटा एक ही गधे पर लदे हैं ... !! ...दोनों ने फिर सोचा फिर बाप कहता है कि बेटा तू बैठा रह और बाप पैदल चलने लगता है अब तीसरे गांव में पहुंचते हैं तो लोग कहते हैं देखो बूढा बाप पैदल चल रहा है और बेटा बैठा है ...फिर बेटा नीचे आ जाता है और बाप को बैठा देता है ..अब अगले गांव पहुँचते हैं तो लोग कहते हैं कि देखो हट्टा कट्टा बाप गधे पर लदा है और छोटे से बच्चे को धूप में पैदल चला रहा है ""

मुझे लगता है की आप भी सब माजरा समझ ही गए होंगे , अगर आप का जवाब हाँ में है तो फिर स्वामी विवेकानंद के उन शब्दों को याद कीजिये चलिए उठिए दौड़िये और अपनी मंजिल को पाने तक ना कभी रुकिए और ना ही हिम्मत हारिये और लोगो के तानो की चिंता मत कीजिये क्योंकि.....

कुछ तो लोग कहेंगे , लोगो का काम है कहना
हम तो चलते रहेंगे हमारा है काम चलना

और आखिर में मैं किसी फ़िल्म का वो डायलॉग भी याद दिलाना चाहूँगा की

जब हम किसी चीज को पाने के लिए पुरे मन से प्रयास करते है तो पूरी कायनात ही उसे हमसे मिलाने में लग जाती है ।

                         ||  समाप्त   ||

आपका मित्र - सुमित सोनी

Thursday, 28 April 2016

हौसले उड़ान के

                उड़ान

एक नन्हा परिंदा उड़ान भरने की कोशिश करता लेकिन बार-बार कुछ ऊपर उठकर गिर जाता। दूर से एक अनजान परिंदा अपने मित्र के साथ बैठा यह सब गौर से देख रहा था। कुछ देर बाद वह उसके करीब पहुंचा और बोला,   क्या हुआ, बहुत परेशान हो।  
नन्हा परिंदा बोला,   मुझे शाम होने से पहले अपने घोंसले तक लौटना है। उड़ान भरना अभी ढंग से नहीं आता। क्या आप मुझे उडऩा सिखा सकते हैं?  
परिंदा बोला,   जब सीखा नहीं तो इतना दूर निकल आने की क्या जरूरत थी।  
वह नन्हे परिंदे का मजाक उड़ाने लगा। अनजान परिंदा हंसते हुए बोला,   देखो, हम तो उड़ान भरना जानते हैं और अपनी मर्जी से कहीं भी जा सकते हैं।
इतना कहकर उसने नन्हे परिंदे के सामने पहली उड़ान भरी। वह फिर थोड़ी देर बाद लौट आया और दो-चार कड़वी बातें बोलकर फिर उड़ गया। ऐसा उसने 5-6 बार किया।
एक बार जब वह वापस लौटा तो नन्हा परिंदा वहां नहीं था। यह देख अनजान परिंदा खुश होते हुए अपने साथी से बोला,   आखिर उस नन्हे परिंदे ने उड़ान भर ही ली।  
साथी बोला,   तुम इतना खुश क्यों हो रहे हो? तुमने तो उसका इतना मजाक बनाया था।
वह बोला,   वास्तव में यह मेरा उसे उडऩा सिखाने का एक तरीका था। मैं उसके लिए अजनबी था। यदि उसे सीधे तरीके से उडऩा सिखाता तो वह पूरी जिंदगी मेरे एहसान तले दबा रहता। उसे दूसरों से मदद मांगने की आदत पड़ जाती। जब मैंने उसे कोशिश करते हुए देखा, तभी समझ गया था कि इसे बस थोड़ी-सी दिशा देने की जरूरत है और वह मैंने बार-बार उसके सामने उड़ते हुए उसे दे दी। अब वह खुद उड़ता रहेगा और दूसरों से मदद कभी नहीं मांगेगा।  
वास्तव में सच्ची मदद वही है, जो मदद पाने वाले को यह महसूस ही न होने दे कि उसकी मदद की गई है।


अब उड़ान भरने का समय आगया है मित्रो ।
यही वक्त है एक ऊँची उड़ान भर के दिखा देने का की

हम नही है किसी और के हाथो के मोहताज
हम तो खुद ही सजायेंगे अपना ताज ।

सुमित सोनी

Wednesday, 23 March 2016

वो - vo


U hi kyu log mil jate hai log
dil me kyu bas jaate hai log
Agr hmari jindagi me nhi aana hota hai 
To Aakhir kyu hmse dil lgate hai log 

Jb Ek din 6od jana hota hai
Jb Ek din tadpana hota hai 
U hmko rat bhar rulana hota hai
To Aakhir kyu hmse dil lgate hai log

आपका दोस्त - सुमित सोनी


Thursday, 18 February 2016

Freedom251 - offer ya ghotala

             फ्रीडम 251          

सावधान घोटाला होने वाला है -
   ये सस्ता मोबाइल का क्लेम करने वाला फ़्रीडम 251 घोटाले के सिवा और कुछ नहीं.
   रिंगिंग बेल एक फ़्रॉड कम्पनी के सिवा कुछ और नहीं है । इस बात की पूरी सम्भावना है कि हमारे हिंदुस्तान के अंदर सस्ते मोबाइल फ़्रीडम 251- जिसका मूल्य 251 रुपए है देने के के नाम पर बहुत बड़ा घपला हो जाये ।

    सावधान रहिये ये एकदम नई कम्पनी है जिसके बारे में कहीं भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. और इंटरनेट पर भी केवल 4-5 पन्नो में ही  विवरण आ रहा है. इस कम्पनी की स्थापना अभी  पिछले वर्ष सितम्बर में ही  हुआ है और इसका वेबसाइट www.freedom251.com पिछले महीने में हीं ख़रीदा गया है. और यह तय है की सस्ते मोबाइल के नाम पर ये 100% घोटाले का हीं काम है.
इसी कम्पनी ( ringing bells.co.in ) ने अभी इसी महीने फ़रवरी में एक स्मार्टफ़ोन रुपए 2999/- में बेचने की कोशिश की पर 10 लोगों का भी ऑर्डर कन्फ़र्म नहीं हुआ. और इस कम्पनी का कोई जवाब भी नहीं आया और इनके द्वारा दिए गए किसी भी नम्बर पर कोई कॉल रिसीव नहीं करता. ईमेल भी बाउन्स बैक हो जाता है. लोग शिकायत कर रहे हैं उन्हें भी इस घोटाले में फँसाया गया और अब यही कम्पनी ऐसे हीं फ़ीचर( 4g की जगह 3G) रुपए 251/- में देने की बात कर रही है ये घोटाला के सिवा और कुछ नहीं दिख रहा.
    तो कृपया सावधान रहें. ये देखिए किस आसानी से और कितना बड़ा गोलमाल हो सकता है:-
  अगर रुपए 251/- भाव से भी हिंदुस्तान के सिर्फ़ 1000000 ( 10 लाख ) लोगों ने भी बुक किया तो 251000000 ( पच्चीस करोड़ दस लाख ) सिर्फ़ दो- चार पेज की वेब साइट / न्यूज़ पेपर ऐड देकर बना लेगी.
  कम्पनी इस चक्कर में है कि छोटी रक़म समझ कर कोई कुछ नहीं करेगा और भूल जाएगा ,और शायद यही होगा भी ............
   अपने 251/- रुपए बचाइए और इस घोटाले का हिस्सा बनने से बचीए.
  कम्पनी आज सुबह 6 बजे से इसकी बुकिंग शुरू की  है,
आशा है कि मेरे इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोग पढ़ेंगे और शेयर भी करेंगे ताकि सभी लोग इस गोलमाल को समझ सके और मूर्ख बनने से बच सके.

धन्यवाद 🙏

आपका दोस्त - सुमित सेठ

Thursday, 4 February 2016

Dil aur dimag

                 

Mujhe aaj tk dil ka structure abhi  completely smjha me nhi aa ska hai.. bs function pta hai aur thoda bahut structure bhi.....

medical science me maine pdha hai ki ye 255 gm ka ye organ sirf blood ko hi pump kr skta hai aur ku6 nhi

Btt

agr hm dusre view se dekhe to ye multifuctional hai..........i mean bhut sare kaam krta hai ...........
Jaise ki 
sari problems yahi creat krta hai aur phir hmare mind ko solution nikalna pdta hai...................
Aur to aur jb kbhi kisi prblm ka solution mind ke pas bhi nhi hota to ye bhi available krva deta hai 
Kbhi prblm creator bn jata hai to kbhi solution dene vala bhi


Bechare dil aur dimag dono hmesha opposite phase me hi rhte hai , kabhi sath nhi rhte ek coin ke do faces ki trh. 
ek hi baat pr ek ha to dusra na, dusra ha to phla na.
pr hm to kisi ek ki hi maan skte hai ..


Kbhi koi khta hai ki dil ki suno kbhi koi khta hai ki dimag ki suno ........ bahut confusion hai yar.....
.
.


ya to dil ki mane ya phir dimag ki......hi man le ...........................
Pr  kiski mane.............. dil ki ya dimag ki ........ ......
to mai bta du ........
Waise mujhe lgta hai ki 
dil k matter me dimag ko door rakkh diya jaye  aur dimag k matter me dil ko........................


Kyo sahi hoga na dil apne cases solve kre aur dimag apne cases solve kre ........tb to tkraar na hogi na .

आपका दोस्त -सुमित सोनी

Wednesday, 3 February 2016

फितरत

                फितरत

1- आदमी भगवान से ,
लाखो करोड़ो की चाहत रखता है
लेकिन जब मंदिर जाता है तो ,
जेब में सिक्के ढूँढता है ।

2- आज कल आदमी मंदिर में भी उस जगह खड़ा होना चाहता है जहाँ से उसकी चप्पल भी दिखे और भगवान जी भी ।

3 - लोग भिखारी को 1 रुपये दान देने से पहले 2 बार उसे ऊपर से नीचे जरूर देखते है ताकि शायद उसे कमाने का सुझाव देके अपना एक रूपया बचा ले 

Sunday, 31 January 2016

बस तुम ही हो




मुझमे तो तुम हो
यादो में तुम हो
 बातो में तुम हो
ख्वाबो में तुम हो
इरादों में तुम हो
नजरो में तुम हो
नजारो में तुम हो
चंदा में तुम हो
सितारों में तुम हो
तुम ही हो सिर्फ तुम ही हो

Saturday, 30 January 2016

तब और अब

गर मुझसे ही था प्यार तुझे,
  कैसे शुरू हुआ नफरतो का सिलसिला ।

कैसे भूल गई उन दिनों को ,
तुम जब हमारा था दिल मिला ।

पहली पहली बार कोई जो ,
मेरे नजरों में छायी रहती थी ।

पहली - पहली बार कोई ,
मेरे दिल में समायी रहती थी ।

मीठी -मीठी सी धुनों को वो ,
बस मेरे संग गाया करती थी ।

सुंदर - सुंदर रंगो से वो ,
मेरे ख्वाबों को सजाया करती थी ।

फूलों जैसी उसकी हंसी थी ,
मुझको भी हंसाया करती थी ।

गम जितने भी दिए मैंने उसे ,
मुझको न रुलाया करती थी ।

Thursday, 28 January 2016

मुस्कुराया जाये - muskuraya jaye

                   थोडा मुस्कुराया जाये

चलो आज फिर
थोडा मुस्कुराया जाये

जलने वालो को बिना
माचिस के जलाया जाये

लोगो को अपनी
 खुशियाँ दिखाया जाये

चलो आज फिर
थोडा मुस्कुराया जाये

आग दुश्मन के दिल में
 फिर से लगाया जाये

जलने वालो को बिना
 माचिस के जलाया जाये

चलो आज फिर
थोडा मुस्कुराया जाये

दिन को अपने आज और
खुशनुमा बनाया जाये

चलो आज फिर
थोडा मुस्कुराया जाये।

आपका दोस्त -- सुमित सोनी

Wednesday, 27 January 2016

मेरा बचपन

           बचपन- छुटपन की यादों में 


खोये छुटपन की यादो में
जब मस्त मगन हम होते थे
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम अनजाने बच्चे थे ।

हर अनजानी चीजो को
देख के खुश हम होते थे
नित सूर्य की नयी रश्मियों को
कोमल हाथों से छूते थे
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम अनजाने बच्चे थे ।

आसमान के उस छोर के
बारे में सोचा करते थे
और तितलियों के पीछे -पीछे
हम बच्चे दौड़ा करते थे
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम अनजाने बच्चे थे ।

खेल कूद खूब दौड़ा भागी
साथियो संग करते थे
कभी था हँसना कभी था रोना
पर मस्ती में ही जीते थे
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम अनजाने बच्चे थे ।।
                   
आपका दोस्त - सुमित सोनी

नजर और नजारें

                   नजर और नज़ारे

बदल दिया है तूने अपने नजरो को ,
और अब नजारों को दोष दे रही है ।

फँस गई है अपने दिल के भँवरों में ,
और अब किनारों  को दोष दे रही है ।

तूने ही किया था इजहार-ऐ -इश्क़ मुझसे ,
और अब मेरे दिल के इशारों को दोष दे रही है ।

     आपका दोस्त - सुमित सोनी

मेरी वो

              मेरी वो .......

वो बारजे में खड़ी थी
हम दीदार कर रहे थे

थे कुछ लोग मोहल्ले में
जो मेरी नसीब पे जल रहे थे

कुछ तो इतने भी कमीने निकले
की मेरे घर पे सब कुछ बता दिया यारो

फिर क्या था जब मै घर पहुंचा तो
पापा डंडा लेकर मेरा इंतजार कर रहे थे ।।

   आपका दोस्त -सुमित सोनी

Tuesday, 26 January 2016

वो शख्श


अनजान रह गया वो
शख्श जिंदगी में 
जिसने औरो की फिक्र में 
जिंदगी गुजार दी ।।

गरीब रह गया वो 
शख्श जिंदगी में
जिसने औरो की जरुरत पर
अपनी उधार दी ।।

वो तो मिटता रहा 
लोगो की खुशियों पर
लोगो ने मिल कर 
उसकी दुनिया उजाड़ दी ।।

वो तो लगाता रहा
उम्र भर चाहत के फूल 
लोगो ने मिलकर 
उसकी बगिया ही उजाड़ दी ।।

फैलता रहा वो हरदम 
प्रकाश सबके जीवन में
सबने मिलकर उसकी जिंदगी 
घुप्प अंधेरो में पाट दी ।।
      
      आपका मित्र - सुमित सोनी